8:57 pm 0 Comments

उपबोली

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

उपबोली बोली से छोटे क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली को उपबोली कहते है।

• उपबोली भी एक तरह की भाषा है लेकिन इसका क्षेत्र बोली की तुलना में छोटी होती है।

जैसे: श्रीनगरी, नागपुरिया, बधानी, सलानी, राठी, माँझ-कुमैया ,दसौल्या, लोहब्या , टेहरी .. यादि ( गढ़वाली की उपबोलियाँ है। )

उपबोली की विशेताएं:

1.उपबोली का क्षेत्र बोली के क्षेत्र से छोटी होती है ।

2.उपबोली में साहित्य की रचना नहीं होती है।

3.उपबोली की व्याकरण नहीं होती है।

4.उपबोली की लिपि नहीं होती है।

5.उपबोली का क्षेत्र बोली की अपेक्षा संकुचित होता है।

Related Posts

सम्पूर्ण भारत का भाषा परिवार

भाषा परिवार: आपस में सम्बंधित भाषाओं के समूह को भाषा परिवार कहते है भारत में कुल पांच भाषा परिवार है 1 इंडो आर्य भाषा परिवार 2 द्रविड़ भाषा परिवार 3 चीनी तिब्बती भाषा परिवार…

भाषा के भेद या भाषा के प्रकार

✓भाषा के प्रकार भाषा के दो प्रकार होता है 1. मौखिक भाषा 2. लिखित भाषा एक अन्य भाषा के प्रकार होता है : सांकेतिक भाषा 1.मौखिक भाषा : यदि कोई व्यक्ति अपने विचार एवं…

उपभाषा

उपभाषा बोली के विकसित रूप को उपभाषा कहते है। जैसेः हिन्दी की पाँच उपभाषाएँ 1.पश्चिमी हिन्दी 2.पूर्वी हिन्दी 3.राजस्थानी हिन्दी 4.पहाड़ी हिन्दी 5.बिहारी हिन्दी उपभाषा की विशेषताएँ: 1.उपभाषा में साहित्य की रचनाएँ होती है।…