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उपबोली

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उपबोली बोली से छोटे क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली को उपबोली कहते है।

• उपबोली भी एक तरह की भाषा है लेकिन इसका क्षेत्र बोली की तुलना में छोटी होती है।

जैसे: श्रीनगरी, नागपुरिया, बधानी, सलानी, राठी, माँझ-कुमैया ,दसौल्या, लोहब्या , टेहरी .. यादि ( गढ़वाली की उपबोलियाँ है। )

उपबोली की विशेताएं:

1.उपबोली का क्षेत्र बोली के क्षेत्र से छोटी होती है ।

2.उपबोली में साहित्य की रचना नहीं होती है।

3.उपबोली की व्याकरण नहीं होती है।

4.उपबोली की लिपि नहीं होती है।

5.उपबोली का क्षेत्र बोली की अपेक्षा संकुचित होता है।

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भाषा के विकास क्रम: उपबोली, बोली, उपभाषा, भाषा

https://youtu.be/g9KNE_ULUpc भाषा के विकास क्रम: √उपबोली √बोली √उपभाषा √भाषा √उपबोली बोली से छोटे क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली को उपबोली कहते है। जैसे: श्रीनगरी, नागपुरिया, बधानी, सलानी, राठी, माँझ-कुमैया ,दसौल्या, लोहब्या , टेहरी…

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